
Last Updated on April 2, 2025 by Sudhir Singh
Summary
सरकार की नई ड्रोन योजना का मकसद ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है। इसके तहत 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि कार्यों के लिए ड्रोन खरीदने में 80% तक (अधिकतम ₹8 लाख) की मदद मिलेगी।
ये समूह किसानों को ड्रोन सेवाएं किराए पर देंगे। महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और तकनीकी कामों की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें कमाई और रोजगार का मौका मिलेगा। यह पहल खेती को स्मार्ट बनाती है, उत्पादकता बढ़ाती है और महिलाओं को छोटे व्यवसाय की ओर बढ़ने में मदद करती है।
सरकार ने हाल ही में एक अहम योजना शुरू की है जिसका मकसद है गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना। यह योजना दीनदयाल अंत्योदय योजना का हिस्सा है, और इसका फोकस है महिलाओं को ड्रोन जैसी उन्नत तकनीक से जोड़कर खेती में इस्तेमाल करने लायक बनाना।
बिंदु | विवरण |
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योजना का उद्देश्य | ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना |
लाभार्थी | 15,000 महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) |
वित्तीय सहायता | ड्रोन लागत का 80% तक, अधिकतम ₹8 लाख प्रति SHG |
ड्रोन का उपयोग | कृषि और बागवानी में कीटनाशक/उर्वरक छिड़काव, किसानों को किराए पर सेवा |
अनुमानित वार्षिक आय | प्रति SHG ₹1 लाख से अधिक |
ट्रेनिंग | 15 दिन की ट्रेनिंग – 5 दिन प्रमाणन, 10 दिन कृषि उपयोग पर व्यावहारिक अभ्यास |
रोजगार अवसर | पायलट: ₹15,000/माह, सहायक: ₹10,000/माह |
तकनीकी लाभ | कम समय में छिड़काव, इनपुट की बचत, फसल उत्पादन में वृद्धि |
लक्षित प्रभाव | महिला उद्यमिता को बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर टेक्नोलॉजी का उपयोग |
महिलाओं को मिलेंगी अपनी खुद की ड्रोन सर्विस
योजना के तहत, देशभर के 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। हर समूह को ड्रोन की कीमत का 80% तक—अधिकतम 8 लाख रुपये—सरकार देगी। इन ड्रोन को महिलाएं किसानों को किराए पर देंगी, खासकर फसल में छिड़काव जैसे कामों के लिए।
जैसे ही ये सेवा शुरू होगी, हर SHG को सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो सकती है। इससे उन्हें अपनी कमाई का नया जरिया मिलेगा, और किसानों को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें सस्ते में नई तकनीक मिल जाएगी।
ट्रेनिंग भी साथ में
महिलाएं केवल ड्रोन नहीं चलाएंगी, उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी। हर समूह से एक महिला को 15 दिन का ड्रोन पायलट कोर्स करवाया जाएगा, जिसमें 5 दिन का सर्टिफिकेट कोर्स और 10 दिन का खेती से जुड़ा प्रैक्टिकल सेशन होगा।
दूसरी सदस्य को टेक्निकल सहायक के तौर पर ट्रेन किया जाएगा। एक बार ट्रेनिंग हो जाने के बाद, पायलट को करीब ₹15,000 और सहायक को ₹10,000 हर महीने की कमाई का मौका मिलेगा। यानी सिर्फ कमाई ही नहीं, महिलाएं प्रोफेशनल स्किल्स भी सीखेंगी।

खेती में तेजी और बचत
ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा है कि ये कम समय में ज्यादा काम करते हैं। जहां इंसानों को दिन लग जाते हैं, वहीं ड्रोन मिनटों में बड़े खेतों में छिड़काव कर सकते हैं। इससे कीटनाशक और उर्वरक की सही मात्रा ही लगती है, जिससे खेती बेहतर होती है और बेवजह खर्च नहीं होता।
इसका मतलब है—कम मेहनत, कम खर्च, और ज्यादा उपज। किसानों की कमाई बढ़ेगी और खेती में तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ेगा।
महिलाओं को बिज़नेस लीडर बनाना
सरकार का मकसद सिर्फ कमाई बढ़ाना नहीं है। असली मकसद है महिलाओं को बिज़नेस ओनर बनाना—जो खुद भी कमाएं और दूसरों को भी काम दें।
इस योजना के तहत हर गांव, हर जिले में एक ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जिसमें महिलाएं खुद की ड्रोन सेवा चलाएंगी। ये उन्हें सिर्फ पैसे नहीं देगा, बल्कि अपने इलाके की लीडर बनने का मौका भी देगा।
क्या है इस योजना की असली खासियत?
- महिलाओं को उन्नत तकनीक से जोड़ना
- गांव में ही कमाई का नया जरिया बनाना
- खेती को ज्यादा स्मार्ट और कुशल बनाना
- महिलाओं को लीडर और उद्यमी बनाना
आख़िर में…
यह योजना एक बड़ा कदम है जो तकनीक, रोजगार और महिला सशक्तिकरण—तीनों को एक साथ जोड़ती है। अगर यह योजना सफल होती है, तो यह एक मॉडल बन सकती है जिसे बाकी संस्थाएं भी अपनाएं।
सबसे बड़ी बात: यह योजना हजारों महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका दे रही है—और यह बदलाव की असली शुरुआत है।
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